द प्रिंट ने मंगलवार (8 जुलाई 2025) को रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें दावा किया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) और INCLEN इंटरनेशनल मिलकर 45 वर्ष से कम उम्र के लोगों में कोविड-19 महामारी के पश्चात अचानक मौतों में किसी पैटर्न की जाँच कर रहे हैं।

इस खबर में बताया गया कि यह राष्ट्रीय स्तर पर एक सामुदायिक अध्ययन होगा, जिसका उद्देश्य अचानक हो रही मौतों की जानकारी रखना और उनके जोखिम के कारकों के बारे में पता करना था।

द प्रिंट द्वारा प्रकाशित समाचार लेख का स्क्रीनशॉट

हालाँकि, द प्रिंट की यह रिपोर्ट पूरी तरह झूठी निकली। PIB ने सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी में इस तरह के किसी भी अध्ययन से इंकार कर दिया। इसमें कहा गया कि ICMR और AIIMS ने विस्तृत रूप से डेटा के आधार पर अध्ययन किया है। इसमें पाया गया है कि कोविड-19 टीकाकरण युवाओं में अचानक मौतों का जोखिम नहीं बढ़ाता बल्कि जोखिम को कम करता है।

जानकारी में ये बात भी शामिल की गई कि हार्ट अटैक और अचानक होने वाली मौतों के असली कारणों में जन्मजात बीमारियाँ, निष्क्रिय जीवनशैली और हृदय-रोग जैसे प्राकृतिक कारक शामिल हैं, न कि कोविड-19 के बचाव में लगाई गई वैक्सीन।

PIB ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “@ThePrintIndia की खबर में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार ने देशभर में अचानक हो रही मौतों के पैटर्न का आकलन करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का अध्ययन शुरू किया है, लेकिन यह दावा गलत है। न तो केंद्र सरकार और न ही @DeptHealthRes (DHR) ने ऐसा कोई सर्वे शुरू किया है।”

अचानक हुई मौतों को कोविड वैक्सीन से जोड़ने का दावा

कोरोना महामारी आने के बाद उसके बचाव में टीकाकरण अभियान चलाया गया। हालाँकि इसके बाद कुछ वर्षों से सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि दिल के दौरे से होने वाली अचानक मौतें कोविड-19 वैक्सीन की वजह से हो रही हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने हाल ही में ऐसे सभी दावों को गलत बताया है।

सरकार ने यह बात ICMR और AIIMS द्वारा किए गए दो बड़े अध्ययनों के आधार पर कही है। इन अध्ययनों में साफ तौर पर पाया गया कि कोविड-19 टीके और दिल के दौरे से होने वाली अचानक मौतों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

इसके अलावा ICMR और NCDC (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) द्वारा किए गए अध्ययन में यह भी साबित हुआ कि भारत में कोविड-19 के टीके सुरक्षित और असरदार हैं। गंभीर साइड इफेक्ट्स के मामले बहुत ही कम हैं।

ICMR और NCDC ने 18 से 45 साल की उम्र के लोगों में अचानक होने वाली मौतों को समझने के लिए 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 47 बड़े अस्पतालों में एक अध्ययन किया।

इसके साथ ही AIIMS ने ICMR के सहयोग से एक और अध्ययन किया जिसमें पाया गया कि अचानक दिल से जुड़ी मौतों के पीछे जेनेटिक कारण है, साथ ही पहले से मौजूद बीमारियाँ और खराब जीवनशैली जैसे कारण भी हैं, न कि कोविड-19 वैक्सीन। विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन को इन मौतों से जोड़ना गलत और भ्रामक है।

प्रोपेगेंडा को फैलाकर भले ही द प्रिंट ने अपनी खबर को बेचने की कोशिश की हो लेकिन वह गलत साबित हो गया। हालाँकि इन भ्रामक खबरों से सबसे अधिक नुकसान आम लोगों का होता है क्योंकि वे इस तरह की खबरों पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं।



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